Monday, 10 June 2019

सबका साथ,सबका विकास

इधर आंध्र के मुख्यमंत्री सरकार बनाने के लिए दिल्ली में नेताओं के घरों के चक्कर लगाते रह गए और उधर वहां की जनता ने उनकी सरकार का तख़्तापलट कर दिया । इस महामिलावटी महागठबन्धन के हारने की शायद ये भी एक वजह रही कि जनता को विश्वास में लेने के बजाय ये एक-दूसरे को विश्वास में लेने में वक़्त ज़ाया करते रहे और भाजपा ज़मीन पर जनता के बीच अपनी पकड़ मज़बूत करने में लगी रही। महागठबंधन में शामिल सभी क्षत्रपों को वंशवाद, जातिवाद और तुष्टिकरण की अपनी राजनीति पर भरोसा था जिस पर मोदीजी की "सबका साथ,सबका विकास" वाली राजनीति भारी पड़ी। ये क्षेत्रीय दल कुछ विशेष जातियों और एक समुदाय विशेष को अपनी बपौती मानकर बैठे थे लेकिन इन चुनावों की सबसे बड़ी ख़ासियत ये रही कि इस बार लोगों ने सवर्ण,एससी-एसटी या ओबीसी बनकर नहीं बल्कि भारतीय बनकर वोट किया और राष्ट्रवाद के सामने जातिवाद जैसे मुद्दे गौण हो गए जो भारतीय लोकतंत्र में एक स्वर्णिम अध्याय जोड़ गया।

जनता का ग़ुस्सा

मध्यप्रदेश और राजस्थान में कांग्रेस की सरकार बने जुम्मा-जुम्मा 6महीने भी नहीं हुए हैं और ऐसा लग रहा है जैसे इन प्रदेशों की जनता ने इस आम चुनाव में भाजपा को प्रचंड बहुमत देकर पश्चाताप किया हो। मध्यप्रदेश में कांग्रेस सरकार ने आते ही तानाशाही रवैया अख्तियार करते हुए विभिन्न विभागों के बेक़सूर सरकारी कर्मचारियों पर एकतरफा कार्यवाही करना शुरू कर दिया। जहां हमारे पूर्व मुख्यमंत्री एक किसान थे जो प्रदेश की सभी महिलाओं के भाई बनकर हम सबके मामा कहलाते थे वहीं वर्तमान मुख्यमंत्री एक उद्योगपति हैं जिनका आचार-व्यवहार भी उद्योगपति जैसा ही है,आसान भाषा में कहें तो हमारे वर्तमान सीएम और पूर्व सीएम की जनता के बीच लोकप्रियता में ज़मीन-आसमान का अंतर है। हमारे पूर्व सीएम आज भी प्रदेश में जहां कहीं जाते हैं तो लोग उनके सामने पछतावे के आंसू बहाने लगते हैं लेकिन वर्तमान सीएम महोदय इस मैदानी हक़ीक़त से मुंह मोड़कर अपनी झूठी क़र्ज़माफी का ही ढिंढोरा पीटते रहे जिसका नतीजा ये रहा कि प्रदेश के दो राजाओं की गद्दी भी छिन गयी।
पिछले आम चुनावों में कांग्रेस पार्टी की लोकतांत्रिक हार हुई थी और इस चुनाव में ये हार नैतिक हार में बदल गयी क्योंकि सर्जिकल स्ट्राइक हो या एयर स्ट्राइक, देश की अंतरिक्ष में ऊंची छलांग का प्रतीक मिशन शक्ति की सफ़लता हो या संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा मसूद अज़हर को वैश्विक आतंकी घोषित करवाने की भारत की कूटनीतिक सफ़लता... हर मौके पर कांग्रेस पार्टी अपनी ही सेना और अपने ही देश की सफ़लता का मखौल उड़ाती नज़र आई और चाहे देश विरोधी नारे लगाने वाले हों या पाकिस्तान समर्थित कश्मीरी अलगाववादी...हर जगह कांग्रेस पार्टी ऐसे देशद्रोही लोगों के समर्थन में खड़ी नज़र आई। सत्ता के लालच और वोट बैंक की राजनीति में ये लोग इतने अंधे हो गए कि इन्हें पता ही नहीं चला कि मोदी का विरोध करते-करते कब ये लोग भारत का विरोध करने लगे । शायद इसीलिए आज भारत की जनता ने लोकतंत्र के हथौड़े से इनके मुँह पर ऐसा तमाचा जड़ा है जिसकी गूंज कई दशकों तक सुनाई देगी।

लोकतंत्र का महापर्व

आज एक बार पुनः साबित हो गया कि हमारे देश का लोकतंत्र कितना मज़बूत है। शायद यही वजह रही कि जनता ने एक ऐसे व्यक्ति को प्रधानमंत्री के रूप में दोबारा अवसर देने का निर्णय लिया जिसके विरोध में सारे बेईमान एक होकर लड़ रहे थे जिन्हें अप्रत्यक्ष रूप से पाकिस्तान का भी समर्थन प्राप्त था। ख़ुद को चौकीदार कहने वाले इस ईमानदार प्रधानमंत्री का खौफ़ भ्रष्ट विरोधियों में इस क़दर बैठा कि सारे चोर चौकीदार से लड़ने के लिए एक मंच पर इकट्ठा हो गए। लेकिन इन बेचारों ने कभी ये नहीं सोचा था कि इनकी यही हरकत जनता के सामने मोदीजी की ईमानदारी की गवाही बन जाएगी और अब इतनी करारी शिकस्त के बाद ये इस हार का विश्लेषण करने की जगह अपनी हार का ठीकरा बेचारी निर्जीव ईवीएम पर फोड़ेंगे। शायद सदियों पहले किसी ने भविष्य देख लिया होगा तभी उसने आज के चुनावी परिप्रेक्ष्य के बारे में इतनी सटीक कहावत बनाई कि "नाच न जाने आंगन टेढ़ा"☺️

Thursday, 23 May 2019

Rani Laxmibai

D queen of Jhansi Rani Laxmibai is a true inspiration for all the women who fought bravely against British army with a limited no of resources. At d time wn most of the Indian rulers like Gwalior maharaj Scindia were sitting idle in shelter of East India company, Rani Laxmibai a fearless lady ws utterly involved in d Indian rebellion for freedom in 1857 against the British rule. She was a wife,a mother,a widow,a queen and a freedom fighter who fought & died for the nation. She inspires all d ladies to raise ur voice against any kind of injustice whether it's been in ur home, in ur family, in ur office or in d society as well. Don't b afraid of such coward men as it's scientifically proven dt either physically, mentally or emotionally women are far more stronger than men so jst stop keep sitting silent & b fearless like Mardaani Jhansi ki Rani Laxmibai.

मैं हिन्दू हूँ

मैं ब्राम्हण हूं जब मै पढता हूँ और पढ़ाता हूँ मैं क्षत्रिय हूँ जब मैं अपने परिवार की रक्षा करता हूँ मैं वैश्य हूँ जब मैं अपने घर का प्रबंधन करता हूँ मैं शूद्र हूँ जब मैं अपना घर साफ रखता हूँ ये सब मेरे भीतर है इन सबके सयोंजन से मै बना हूँ क्या मेरे अस्तित्व से किसी एक क्षण भी इन्हे अलग कर सकते है क्या किसी भी जाति के हिन्दू के भीतर से ब्राहमण,क्षत्रिय ,वैश्य या शुद्र को अलग कर सकते है? वस्त्तुतः सच यह है कि हम सुबह से रात तक इन चारो वर्णो के बीच बदलते रहते हैं। मुझे गर्व है कि मैं एक हिंदू हूँ मेरे टुकड़े टुकड़े करने की कोई कोशिश न करे।
बीते शनिवार रविंद्र नाट्यगृह में मुझे लगभग 10महीने बाद आध्यात्मिक गुरु और विश्व भर में हनुमान चालीसा के द्वारा ध्यान का प्रचार-प्रसार करने वाले एवं उज्जयिनी में "शांतम" के संस्थापक परम ज्ञानी पंडित विजयशंकर मेहता जी को पुनः सुनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। पंडितजी के व्याख्यान का विषय था "संबंधों में समरसता के सूत्र", व्याख्यान की शुरुआत में संबंधों या रिश्तों का महत्व बताते हुए पंडितजी कहते हैं कि संबंध बनाना और बिगाड़ना तो बहुत सरल है लेकिन संबंध निभाना सबसे कठिन काम है,ख़ासकर आज के समय में जब हमारे रिश्तों में पारदर्शिता का अभाव है। आज के युग में पारदर्शिता की जगह संदेह ने ले ली है। पंडितजी ने बताया कि रिश्ते चार तरह से बनाये जाते है- पहला शरीर से,दूसरा मन से,तीसरा हृदय से और चौथा आत्मा से। पंडितजी कहते हैं कि शरीर से बनाये रिश्ते में मस्ती होना चाहिए,मन के रिश्ते में भोलापन, हृदय के रिश्ते में निर्भयता होनी चाहिए लेकिन इन सबसे महत्वपूर्ण रिश्ता वो है जो आत्मा से जुड़ा होता है और वो आत्मा से इसलिए जुड़ा होता है क्योंकि इस रिश्ते में विश्वास होता है जो किसी भी मज़बूत रिश्ते के लिए नींव की तरह होता है।