Thursday, 23 May 2019

Rani Laxmibai

D queen of Jhansi Rani Laxmibai is a true inspiration for all the women who fought bravely against British army with a limited no of resources. At d time wn most of the Indian rulers like Gwalior maharaj Scindia were sitting idle in shelter of East India company, Rani Laxmibai a fearless lady ws utterly involved in d Indian rebellion for freedom in 1857 against the British rule. She was a wife,a mother,a widow,a queen and a freedom fighter who fought & died for the nation. She inspires all d ladies to raise ur voice against any kind of injustice whether it's been in ur home, in ur family, in ur office or in d society as well. Don't b afraid of such coward men as it's scientifically proven dt either physically, mentally or emotionally women are far more stronger than men so jst stop keep sitting silent & b fearless like Mardaani Jhansi ki Rani Laxmibai.

मैं हिन्दू हूँ

मैं ब्राम्हण हूं जब मै पढता हूँ और पढ़ाता हूँ मैं क्षत्रिय हूँ जब मैं अपने परिवार की रक्षा करता हूँ मैं वैश्य हूँ जब मैं अपने घर का प्रबंधन करता हूँ मैं शूद्र हूँ जब मैं अपना घर साफ रखता हूँ ये सब मेरे भीतर है इन सबके सयोंजन से मै बना हूँ क्या मेरे अस्तित्व से किसी एक क्षण भी इन्हे अलग कर सकते है क्या किसी भी जाति के हिन्दू के भीतर से ब्राहमण,क्षत्रिय ,वैश्य या शुद्र को अलग कर सकते है? वस्त्तुतः सच यह है कि हम सुबह से रात तक इन चारो वर्णो के बीच बदलते रहते हैं। मुझे गर्व है कि मैं एक हिंदू हूँ मेरे टुकड़े टुकड़े करने की कोई कोशिश न करे।
बीते शनिवार रविंद्र नाट्यगृह में मुझे लगभग 10महीने बाद आध्यात्मिक गुरु और विश्व भर में हनुमान चालीसा के द्वारा ध्यान का प्रचार-प्रसार करने वाले एवं उज्जयिनी में "शांतम" के संस्थापक परम ज्ञानी पंडित विजयशंकर मेहता जी को पुनः सुनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। पंडितजी के व्याख्यान का विषय था "संबंधों में समरसता के सूत्र", व्याख्यान की शुरुआत में संबंधों या रिश्तों का महत्व बताते हुए पंडितजी कहते हैं कि संबंध बनाना और बिगाड़ना तो बहुत सरल है लेकिन संबंध निभाना सबसे कठिन काम है,ख़ासकर आज के समय में जब हमारे रिश्तों में पारदर्शिता का अभाव है। आज के युग में पारदर्शिता की जगह संदेह ने ले ली है। पंडितजी ने बताया कि रिश्ते चार तरह से बनाये जाते है- पहला शरीर से,दूसरा मन से,तीसरा हृदय से और चौथा आत्मा से। पंडितजी कहते हैं कि शरीर से बनाये रिश्ते में मस्ती होना चाहिए,मन के रिश्ते में भोलापन, हृदय के रिश्ते में निर्भयता होनी चाहिए लेकिन इन सबसे महत्वपूर्ण रिश्ता वो है जो आत्मा से जुड़ा होता है और वो आत्मा से इसलिए जुड़ा होता है क्योंकि इस रिश्ते में विश्वास होता है जो किसी भी मज़बूत रिश्ते के लिए नींव की तरह होता है।

Tuesday, 28 August 2018

Shantam

"एक शाम रिश्तों के नाम" बीते शनिवार रविन्द्र नाट्यगृह में समागम हुआ धार्मिक,आध्यात्मिक और पारिवारिक त्रिवेणी का,मौक़ा था पंडित विजयशंकर मेहता जी के आख्यान का। Panditji basically belongs to Ujjain who hs been teaching life management tips by Hanuman chalisa for last 10yrs in various cities,bt i've got d golden opportunity to listen hm ds Saturday only and it was a mesmerizing experience for me. Along with ds, he has also created a new mechanism to do Hanuman chalisa and dt is "Hanuman chalisa with breathing" means inhale/exhale with every line of Hanuman chalisa and luckily dt day morning only i'd experienced ds too in my Yoga class and dt experience ws smthing i can't explain here. Panditji also write a regular article named "Jeene ki raah" in Dainik bhaskar and nw hs new venture called "Shantam" is goint to start next year on 19th April on d spcl occasion of Hanuman jayanti. In Shantam, a proper training session of 20min will b provided by Panditji hmself to d devotees who want to learn hw to do Hanuman chalisa with breath. According to Panditji,v mst do ds jst for 5min in each prahar. Since v all know dt dere r 4Prahars in a day so 5*4=20min only v hv2 spend for this mental relaxation activity in a whole day and trust me,its like a Sanjeevani for ur inner peace.

Thursday, 23 August 2018

Youth icon Atalji

It was the year1996 wn i ws only 5yrs old and everybody ws watching live telecast of no confidence motion against d government wch ws lost by d ruling party BJP and PM Atalji ws giving hs emotional and historic speech. I still remember dt my Mom,Nana-Nani,Mama,both of my mausi..all of my family members were feeling so disappointed. I wasn't dt much disappointed bcz i ws unable to understand that wt ws exactly going on? Bt i ws feeling sad for Vajpayee ji bcz dt time he was the only politician i knew and 1thing I knew abt hm dt he ws a good human being and honest leader. D conclusion is dt,like me dere r so many youth who start favouring BJP Jst bcz of Atal ji and BJP Didn't let us down till the date.

विपक्ष के नेता

इस देश ने कई ऐसे बड़े नेताओं को देखा है जिन्हें राजनीति विरासत में मिली और जो सालों तक सत्ता में रहकर लोकप्रियता के शिखर पर पहुंचे जिसकी परिणति आज हमें देश के हर गली-चौराहों पर इनकी बड़ी-बड़ी मूर्तियों या सड़कों के नाम के बोर्ड पर दिखाई देती है। साथ ही देश की लगभग हर बड़ी योजना इन नेताओं ने ख़ुद के नाम से ही शुरू की। ज़ाहिर है कि इन नेताओं ने हर क़दम पर ख़ुद के नाम को प्रधानमंत्री के पद से बड़ा बनाने की कोशिशें कीं। इन सबसे जुदा दो महान राजनेता अस्तित्व में आये,पहले थे लाल बहादुर शास्त्री जी,जिनकी ईमानदारी और सादगी के किस्से पूरी दुनिया में मशहूर हैं और दूसरे थे हम सबके प्यारे अटल जी। हालांकि इन दोनों को राजनेता कहना शायद इनका अपमान होगा क्योंकि इनका व्यक्तित्व राजनीति से कहीं ऊपर था। शास्त्री जी को तो हमारी पीढ़ी ने देखा नहीं लेकिन वाजपेयीजी आज की पीढ़ी के मेरे जैसे कई नौजवानों के लिए प्रेरणास्रोत रहे हैं। हालांकि वाजपेयीजी बाकी सभी नामचीन नेताओं की तुलना में सबसे कम यानी सिर्फ़ 6साल के लिए सत्ता में रहे,बाकी के पूरे 41साल वो विपक्ष में रहे यानी अटलजी अपने पूरे राजनीतिक करियर में सत्ता में व्याप्त भ्रष्टाचार और राष्ट्र-विरोधी नीतियों के ख़िलाफ़ एक शक्तिशाली सत्ताधारी परिवार से अकेले लड़ते रहे और आखिरकार किसी खानदानी विरासत के ज़रिए नहीं बल्कि अपनी कड़ी मेहनत के दम पर सत्ता के शिखर तक पहुंचे। अपने राजनीतिक जीवन में पूरे समय विपक्ष में रहने वाले किसी नेता की इतनी अधिक लोकप्रियता हमने पहले कभी नहीं देखी और न ही शायद कभी देख पायें क्योंकि अटलजी जैसे लोग विरले ही पैदा होते हैं।

भीष्म पितामह

अटलजी पिछले 9साल से स्ट्रोक की वजह से मूक हो गए थे और पूरी तरह सार्वजनिक जीवन से भी दूर थे,उसके बावजूद दिल्ली में उनकी अंतिम यात्रा और फ़िर हरिद्वार में उनकी अस्थि-विसर्जन यात्रा में लोगों का सैलाब देखने को मिला और भारत के कोने-कोने से लोग उन्हें अंतिम विदाई देने पहुंचे जिसमें बड़ी संख्या में कांग्रेस के कार्यकर्ता भी थे और बंगाल,हैदराबाद,तेलांगना जैसी जगहों से भी लोग उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंचे जिन स्थानों पर अटलजी के समय बीजेपी का नामोनिशान नहीं था। यहां तक कि भारत ही नहीं बल्कि हमारे लगभग सभी पड़ोसी देशों से राजनयिक इतने कम समय में उन्हें श्रद्धांजलि देने दिल्ली पहुंच गए, भूटान और मलेशिया जैसे देशों में तो राष्ट्रीय ध्वज आधे दिन के लिए झुका दिया गया। दिल्ली में स्थित ब्रिटिश दूतावास में भी यूनियन जैक को झुका दिया गया। ये सब इस बात का प्रमाण है कि अटलजी 20वीं सदी के सबसे लोकप्रिय भारतीय नेता थे।